जीवनशैली में बदलाव से एसिडिटी को ठीक करें

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जीवनशैली में बदलाव से एसिडिटी को ठीक करें

आधुनिक युग में अनेक लोग पेट के गैस संबंधी विभिन्न परेशानियों जैसे पेट फूलना, डकारें आना, वात के कारण वजन बढ़ना, पेट में गैस बनना, खट्टी डकारें आना आदि से पीड़ित  नज़र आते हैं। इन सभी परेशानियों को केवल एक नाम एसिडिटी से जुड़ी परेशानियों के रूप में जाना जा सकता है। इनका यदि समय पर इलाज न किया जाये तब यह विभिन्न गंभीर बीमारियाँ जैसे कैंसर, मधुमेह, त्वचा संबंधी परेशानियाँ, बढ़े वजन को कम न कर पाना, बालों का खराब होना आदि के रूप में बदल जातीं हैं। जैसा की सब जानते हैं कि शरीर की कोशिकाओं को स्वस्थ रखने के लिए प्रत्येक कोशिका को ऑक्सीज़न की ज़रूरत होती है। लेकिन जब शरीर में एसिडिटी की परेशानी होती है तब यही कोशिकाएँ पूरी तरह से ऑक्सीज़न न मिल पाने के कारण बीमार हो जाती हैं। परिणामस्वरूप शरीर विभिन्न बीमारियों से घिरजाता है। इसलिए एसिडिटी या किसी भी गंभीर बीमारी से पीछा छुड़ाना है तो अपनी जीवनशैली में निम्न परिवर्तन करके यह काम किया जा सकता है.

एंटीएसिड 
एंटीएसिड लेने का कोई विशेष लाभ नहीं होता है क्योंकि इनके अपने साइड इफेक्ट होते हैं। यदि आप इन दवाइयों को नियमित रूप से लेते हैं तब आपका शरीर इनका अभ्यस्त हो सकता है। कुछ समय बाद आपको इनका असर होने देने के लिए ऊंचे स्तर की दवाइयाँ जल्दी-जल्दी लेनी होंगी। अधिकतम एंटीएसिड मैग्निशियम से युक्त होते हैं जो उल्टी-दस्त का कारण बन जाता है और जब इसमें एल्मुनियम मिलता है तब इसके लेने से कब्ज़ होता है। उच्च रक्तचाप और किडनी की बीमारी से ग्रस्त लोगों पर एंटीएसिड उनकी द्वारा ली जाने वाली दवाइयों के साथ मिलकर उन मरीजों की हालत और खराब कर देती हैं। इस कारण एसिडिटी से मुक्त होने के लिए ली जाने वाली एंटीएसिड केवल एक साधारण उपाय मात्र तो है लेकिन यह दवाइयाँ केवल लक्षणों पर ही काम करती हैं।
जीवनशैली के संबंध में हम समस्या की जड़ पर काम करते हैं। इसलिए आपकी एसिडिटी की समस्या को दूर करने के लिए हम आपको जीवनशैली परिवर्तन के संबंध में कुछ सरल व आसान उपाय बताएँगे जिनके अपनाने से आपकी एसिडिटी तुरंत दूर हो सकेगी।

भोजन के बीच का अंतराल
हमें यह समझना होगा कि शरीर में भोजन को पूरी तरह से पचने के लिए साढ़े तीन से लेकर चार घंटे तक लगते हैं। इसके बाद पेट पाचन के लिए ज़रूरी रसायन HCL का निर्माण करता है। इसलिए यदि आप अगले भोजन को लेने के लिए साढ़े तीन घंटे से लेकर चार घंटे से अधिक का समय लगाते हैं तब आपको गैस की परेशानी अपने आप ही शुरू हो सकती है। क्योंकि जब आपने इस समय में कुछ नहीं खाया है तब भी आपके पेट में साढ़े तीन घंटे से लेकर चार घंटे बाद वह रसायन तो बन ही रहा है। अब इस समायावधि में यदि पेट में पाचन के लिए कोई भोजन मौजूद नहीं है तब इस रसायन के काम करने के लिए भी कुछ उपलब्ध नहीं है। इस स्थिति में यह रसायन पेट की आंतरिक श्लेषात्मक झिल्ली को प्रभावित करने लगता है जिस कारण पेट में अल्सर और खट्टी डकारों की समस्या हो सकती है। खट्टी डकारें वास्तव में पेट में बना वह अतिरिक्त बना एसिड है जो पेट में कोई भोजन न होने पर बना है और शरीर उसे बाहर निकाल देना चाहता है। इसके कारण आप अपनी छाती में जलन सी महसूस करते हैं जो पेट के ऊपरी हिस्से से लेकर गले तक आती है। खट्टी डकारें पेट के उस हिस्से को बड़ा नुकसान करतीं है जो महीन और नाज़ुक उत्तकों से बना होता है। इसलिए सबसे पहले अपनी जीवनशैली में इस प्रकार का परिवर्तन करें कि आपको अपने दो भोजन के बीच में लंबा अंतराल नहीं रखना है। दो भोजन के बीच के अंतराल के लिए साढ़े तीन घंटे से लेकर चार घंटे तक का समय आदर्श माना जाता है। इसलिए आपको एसिडिटी से बचना है तब अपने सुबह का नाश्ता, दोपहर का भोजन, शाम की चाय और रात का खाना जीवनशैली के परिवर्तन संबंधी इसी नियम के अनुसार लेना होगा।

भोजन अच्छी तरह चबा कर खाना चाहिए
हम सब जानते हैं कि भोजन के पाचन की प्रक्रिया मुँह से ही शुरू हो जाती है। आपके दाँत भोजन को छोटे-छोटे हिस्सों में काट देते हैं। यदि आप अपने भोजन को जल्दी-जल्दी बिना चबाये ही बड़े हिस्सों के रूप में पेट में भेज देते हैं तब पेट को इन बड़े हिस्सों को पचाने के लिए अतिरिक्त एसिड का निर्माण करना पड़ता है। परिणामस्वरूप अधिक एसिड का निर्माण का अर्थ अधिक एसिडिटी का होना होता है। इसलिए जब आप बिना चबाये और जल्दी-जल्दी भोजन करते हैं तब आपके पेट में खट्टी डकारें और एसिडिटी की परेशानी अधिक हो सकती है। इसलिए हमें भोजन को अच्छी तरह से चबा कर ही खाना चाहिए। हमारे मुँह में बनने वाली लार में वह मुख्य रसायन होता है जो भोजन में उपलब्ध वसा और कार्बोहाइड्रेट को मुँह में ही पचाने का काम करता है। इसलिए जब अच्छी तरह पचा भोजन पेट में जाता है तब पेट में भोजन को पचाने के लिए कम एसिड बनाने की ज़रूरत होगी। इसके विपरीत जब शरीर में एसिड का निर्माण अधिक होता है तब भोजन में उपलब्ध पोषक तत्व औरविटामिन इस एसिड के कारण नष्ट हो जाते हैं। इसीलिए आपको अपने खाये हुए भोजन से समुचित पोषण नहीं मिल पाता है।

भोजन का नियत समय
अपने भोजन का दैनिक रूप से नियत समय का होना बहुत ज़रूरी होता है। इसलिए अपना सुबह के नाश्ते से लेकर रात के खाने तक का समय रोज एक ही होना चाहिए। हमारे मस्तिष्क की ही भांति हमारे शरीर की मांसपेशियों, कोशिकाओं और उत्तकों में भी याद रखने की क्षमता होती है। इसलिए रोज नियत समय पर भोजन करने से शरीर की मांसपेशियों और पेट की याददाश्त में यह बात दर्ज है कि किस नियत समय पर भोजन खाया जाएगा और उसी के अनुसार पाचन रसायन का एकसमान निर्माण होता है। इसलिए अपने भोजन का प्रतिदिन के अनुसार एक नियत समय का होना बहुत ज़रूरी है।

खाया जाने वाला भोजन क्या है
जब आप फल, सब्जी, दालें, साबुत अनाज, सूखे बीज और मेवे इत्यादि अपने भोजन में लेते हैं तब शरीर में इन्हें पचाने के लिए सही मात्रा में एसिड का निर्माण होता है। लेकिन समस्या यह है कि हमारा शरीर इस प्रकार का भोजन जैसे जंक फूड, डिब्बाबंद खाना, अधिक मीठे, नमक, हवा भरे पेय आदि को पचाने में असमर्थ होता है। हमारे शरीर को इस प्रकार के  अप्राकृतिक भोजन को पचाने के लिए अधिक एसिड के निर्माण कि ज़रूरत होती है। इसलिए थोड़ी मात्रा में भी लिया गया इस प्रकार का भोजन जब पेट में जाता है तब उसे पचाने के लिए पेट को अधिक एसिड के निर्माण की जरूरत होती है तब हमें एसिडिटी की शिकायत होना निश्चित है।

ध्यान लगाना
हमें अपनी जीवनशैली में ध्यान लगाने को भी शामिल करना चाहिए। हमारे विभिन्न प्रकार की दवाइयों के लेने से शरीर को इन्हें पचाने के लिए अधिक एसिड के निर्माण की ज़रूरत होती है। इसलिए जब आप एंटीबायोटिक लेते हैं तब इस बात का ध्यान रखें कि साथ में प्रोबायोटिक और विटामिन बी कॉम्प्लेक्स ज़रूर लें। क्योंकि एण्टीबायोटिक्स हमारे शरीर से हर प्रकार के विषाणु को साफ कर देतीं हैं और परिणामस्वरूप शरीर में अधिक एसिड का निर्माण होने लगता है जो शरीर के विटामिन बी कॉम्प्लेक्स को भी पूरी तरह साफ कर देता है। इसलिए आपको संतुलन बनाए रखने के लिए इसे बाहर से देना होगा।

क्षारीय संतुलन
शरीर में ज़रूरी क्षार का होना बहुत ज़रूरी है। हमारे शरीर में पीएच नियंत्रक होता है जो हमारे शरीर को क्षारीय रखने में समर्थ होता है। लेकिन खराब जीवनशैली जीने के कारण हम खराब भोजन लेते हैं और परिणामस्वरूप शरीर को अधिक एसिड के निर्माण कि ज़रूरत होती है। इसलिए इस समस्या के निदान के रूप में शरीर को क्षारीय रखने के लिए एक गिलास नींबू पानी या एक कटोरी खीरे अथवा कच्ची सब्जियों का सलाद भी काफी होगा। यह तब और भी अधिक ज़रूरी होता है जब हम डिब्बाबंद और प्रोसेस्स्ड़ खाना खाते हैं तबहमारे शरीर में अधिक एसिड का निर्माण के लिए अधिक एसिड का निर्माण अनिवार्य हो जाता है।

पानी और ऑक्सीज़न
अधिकतर लोग दिन में पानी कम पीते हैं। यह ध्यान रखें की एक बूंद कम पानी भी शरीर में थकान, एसिडिटी के अलावा शरीर में असंख्य परेशानियों का कारण हो सकती है। इसलिए यह बहुत जरूरी है कि प्रतिदिन आपके शरीर में सही मात्रा में पानी की मात्रा बनी रहे। इसके अलावा विभिन प्रकार के उपाय जैसे ध्यान लगाना, योग और प्राणायाम जैसे सांस संबंधी व्यायाम भी एसिडिटी की परेशानी को कम कर सकते हैं। शरीर में ऑक्सीज़न का पर्याप्त मात्रा में भी होना बहुत ज़रूरी है। हमारे सांस लेने की प्रक्रिया में शरीर में पहुँचने वाली ऑक्सीज़न शरीर को क्षारीय व एसिडिक में संतुलन स्थापित रखने में मदद करती है। इसमें आपकी सहायता करने के लिए एक बहुत साधारण व्यायाम बताया जा रहा है जो भोजन करने से पहले किया जा सकता है। जब भी आप भोजन करने के लिए बैठें तब आप उससे पहले तीन बार गहरी सांस भरें। इससे आपके शरीर में पर्याप्त ऑक्सीज़न पहुँच जाएगी जो खाये जाने वाले भोजन को सरलता से पचाने में सहायक हो सकती है। इसलिए आप इस प्रकार का अभ्यास करें कि अगर एक चम्मच भी आप कुछ खा रहे हैं तो गहरी सांस जरूर भरें। सांस को एक बार अंदर लें और एक बार बाहर निकालें


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